रेखा शर्मा के बयान पर हंगामे के बाद कुलदीप बिश्नोई की राजनीतिक डगर हुई मुश्किल
कुलदीप के सामने तीन बड़े विकल्प लेकिन तीनों ही असमंजस में डालने वाले

सत्य खबर हरियाणा
Political Option for Kuldeep Bishnoi : भाजपा की राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा के एक बयान ने हरियाणा की राजनीति में तूफान ला रखा है। पिछले 12 दिनों से प्रदेश की राजनीति रेखा शर्मा के बयान और उसके बाद कुलदीप बिश्नोई तथा अन्य लोगों के बयानों को केंद्र में रखकर चल रही है। चंद्र मोहन बिश्नोई ने रेखा शर्मा के खिलाफ आपराधिक और कानूनी दोनों ही प्रकार के मामलेदार किए हैं लेकिन इसके बावजूद रेखा शर्मा की ओर से अभी तक माफी मांगे जाने का कोई संकेत नहीं है। कुलदीप बिश्नोई भी साफ कर चुके हैं की रेखा शर्मा अगर माफी नहीं मांगती है तो वह अलग राजनीति के बारे में विचार करेंगे।

इस बात में कोई शक नहीं है कि हरियाणा में कुलदीप बिश्नोई के पास 5 से 7 फीसद तक का वोट बैंक है। इस वोट बैंक को वह अपने हिसाब से तबदील करने में सक्षम भी हैं। हालांकि इस वोट बैंक के सहारे वह कोई लंबी चौड़ी जीत हासिल करने की स्थिति में नहीं है लेकिन इतना जरूर है कि वह किसी का भी खेल बना और बिगाड़ सकते हैं।
इस बात को भाजपा के बड़े नेता भी अच्छे तरीके से समझते हैं। 2024 के अक्टूबर में हुए विधानसभा चुनाव में अगर कुलदीप बिश्नोई भाजपा के साथ नहीं और वह कांग्रेस में होते तो भाजपा को बड़ा झटका लग सकता था। पिछले चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच एक प्रतिशत से भी कम वोट बैंक का अंतर रहा है और अगर कुलदीप बिश्नोई उलट स्थिति में होते तो कांग्रेस बीजेपी से करीब 12% ज्यादा वोट बैंक ले चुकी होती और उस स्थिति में भाजपा बहुत नीचे खिसक सकती थी।
हालांकि भाजपा के नेता वर्तमान में कुलदीप बिश्नोई के साथ लंबी बातचीत कर उन्हें मनाने का प्रयास कर सकते हैं लेकिन रेखा शर्मा माफी मांगे यह शर्त कुलदीप बिश्नोई की रहने वाली है। भाजपा के जानकार मानते हैं की रेखा शर्मा माफी मांगने के मूड में बिल्कुल भी नजर नहीं आ रही हैं। ऐसे में वर्तमान में भाजपा नेता कुलदीप बिश्नोई के सामने तीन विकल्प बचे हैं। पहला, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के कभी बहुत करीबी रहे कुलदीप बिश्नोई के पास कांग्रेस में लौटने का पहला विकल्प मौजूद है। हालांकि कांग्रेस में उनकी हालत अशोक तंवर और बृजेंद्र सिंह जैसी नहीं होगी, इस बात की कोई गारंटी नहीं है।
दूसरा विकल्प, दोबारा से हरियाणा जनहित कांग्रेस (भजनलाल) को खड़ा करने का है, जो कुलदीप बिश्नोई के पिता स्व. भजनलाल ने कांग्रेस से अलग होने के बाद बनाई थी। कुलदीप बिश्नोई हरियाणा जनहित कांग्रेस का एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा में विलय कर चुके हैं। एक बार फिर पार्टी को खड़ा करना इतना आसान नहीं है। क्षेत्रीय दल धीरे-धीरे खत्म होते जा रहे हैं और ऐसे में एक नया क्षेत्रीय दल बनाना और उसे खड़ा करना अपने आप में बड़ा मुश्किल काम है।
उनके पास तीसरा विकल्प इनेलो व जजपा के साथ मिलकर गैर-जाट राजनीति करने का है। लेकिन इनेलो प्रमुख अभय सिंह चौटाला उन्हें इसका मौका प्रदान करेंगे अथवा नहीं, यह भी भविष्य का सवाल है।
हरियाणा की राजनीति के नेपथ्य में तीन लालों की कहानी कही जाती है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल जब राज्य के मुख्यमंत्री बने थे, तभी से चौथे लाल की राजनीतिक कहानी चालू हो गई थी। मनोहर लाल हरियाणा की राजनीति के ऐसे चौथे लाल हैं, जो पूर्व के तीन लालों देवीलाल, बंसीलाल और भजनलाल के राजनीतिक वारिसों को भाजपा में लाने में सफल रहे। देवीलाल के पड़पोते दुष्यंत चौटाला के साथ साढ़े चार साल तक मनोहर लाल ने सरकार चलाई।
एक और विकल्प यह भी है कि कुलदीप बिश्नोई भाजपा को छोड़कर भविष्य की राजनीति की तस्वीर को देखने का इंतजार करते हुए अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने का काम करें और चुनाव से कुछ पहले वह कोई बड़ा फैसला कर राजनीति की दिशा तय करने का काम करें।
1. #KuldeepBishnoi 2. #PoliticalChallenges 3. #RekhaSharmaStatement 4. #PoliticalPath 5. #ConfusingChoices 6. #LeadershipDilemma 7. #PoliticalUproar 8. #DecisionMaking 9. #PoliticalStrategy 10. #BishnoiPolitics 11. #CurrentAffairs 12. #PoliticalAnalysis 13. #IndianPolitics 14. #PoliticalOptions 15. #CrisisManagement 16. #PoliticalFuture 17. #PoliticalDebate 18. #PoliticalInsights 19. #BishnoiVsChallenges 20. #PoliticalLandscape